मंगलवार, 6 अप्रैल 2010

सबसे बड़ा हमला, 70 जवान शहीद


देश के इतिहास का सबसे बड़ा हमला करते हुए नक्सलियों ने आज छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में 70 से ज्यादा जवानों को मौत की नींद दिया। मृतकों में सीआरपीएफ का 1 डिप्टी कमांडेंट भी शामिल है। हमले में 20 से ज्यादा जवानों के गम्भीर रूप से घायल होने की खबर है। जबकि वारदात के बाद से करीब 50 जवान लापता बताए जा रहे हैं। फिलहाल दंतेवाड़ा जिले के 6 अलग-अलग ठिकानों पर सुरक्षा बल और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ जारी है। नक्सली हमले की रक्षामंत्री पी. चिदम्बरम और मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने निंदा की है। नक्सल इतिहास की इस सबसे बड़ी वारदात के पश्चात आज ही राजधानी रायपुर में आपात बैठक बुलाई गई। इस बैठक में केन्द्र सरकार के प्रतिनिधियों के अलावा मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, सीआरपीएफ के प्रतिनिधि और प्रदेश के आला पुलिस अफसरों के साथ ही गृह सचिव, डीजीपी, और मुख्य सचिव शामिल हुए।
सूत्रों के अनुसार आज सुबह चिंतागुफा थाने से पुलिस का संयुक्त बल सर्र्चिंग के लिए चिंतलनार की ओर रवाना हुआ था। ग्राम ताड़मेटला के समीप जंगल में घात लगाए बैठे नक्सलियों ने पुलिस पार्टी पर हमला कर दिया। सूत्रों के अनुसार नक्सली का यह हमला पूरी तरह सुविचारित और योजनाबद्ध था। पुलिस पार्टी कल शाम सर्चिग के लिए रवाना हुई थी जिसे आज सुबह लौटना था। इसीलिए नक्सलियों ने उन पर हमले की पूरी तैयारी कर रखी थी। नक्सली शहीद जवानों के हथियार भी लूटकर ले गए। बताया जाता है कि चिंतननार के ताड़केटला में नक्सलियों ने पहले घात लगाकर हमला किया। इस हमले में घायल हुए जवानों को लेने जब सीआरपीएफ के जवान एंटी लैंडमाइन व्हीकल से ताड़केटला जा रहे थे, इसी दौरान नक्सलियों ने दूसरा हमला बोलते हुए एंटी लैंडमाइन वाहन को उड़ा दिया। बताया जाता है कि मुठभेड़ में नक्सलियों से जूझ रहे बल को मदद देने चिंतलनार से अतिरिक्त पुलिस बल एंटी माईंस व्हीकल से रवाना किया गया था। यह बल लगभग दो किलोमीटर दूर आगे बढ़ा ही था कि नक्सलियों ने बारूदी सुरंग विस्फोट कर दिया। विस्फोट में बुलेट पू्रफ वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है। इस विस्फोट में चालक सहित एक जवान शहीद हो गए। इस बीच दोरनापाल से भी मुठभेड़ स्थल की ओर पुलिस बल रवाना हुआ था, जिस पर घाटी के पास नक्सलियों ने हमला कर दिया। बताया जाता है कि वारदात को अंजाम देने के लिए करीब 1000 नक्सली पहले से ही तैयार बैठे थे। सभी मृतक और घायल जवान 62वीं बटालियन के जवान हैं। घायलों को लाने के लिए जगदलपुर से हेलीकाप्टर रवाना किया, जिसके पश्चात बारी-बारी से घायल जवानों को चिंतलनार लाया गया। यहां से घायलों की स्थिति को देखते हुए उन्हें जगदलपुर और रायपुर के अस्पताल रवाना किया गया।
यहां यह उल्लेख करना लाजिमी होगा कि लगभग तीन वर्ष पूर्व बीजापुर जिले के रानीबोदली में नक्सलियों ने मध्य रात्रि में पुलिस कैम्प पर धावा बोलकर 55 जवानों को मौत की नींद सुला दिया था। इधर, गृहमंत्री पी. चिदम्बरम ने आज दिल्ली मे घटना की निंदा की। उन्होंने मृतकों की संख्या और बढऩे की आशंका भी जताई। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने नक्सली हमले की निंदा करते हुए घटना को दुखद बताया। उन्होंने कहा कि यह नक्सल हिंसा की पराकाष्ठा है। नक्सलियों ने हिंसा और अराजकता की सारी सीमाएं पार कर ली है। आज की वारदात से नक्सलियों का असली चेहरा बेनकाब हुआ है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रविन्द्र चौबे ने भी घटना की पुरजोर निंदा की है। उन्होंने कहा कि यह वक्त आलोचना करने का नहीं है। जवानों ने पूरा शौर्य दिखाया है। श्री चौबे ने कहा कि बिना किसी योजना के जवानों को बीहड़ों में नहीं भेजा जाना चाहिए।

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बुरी खबर , दिल बैठ गया
    खैर आप मेरे ब्लॉग पर आये , टिप्पड़ी की , धन्यवाद
    madhavrai.blogspot.com

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  2. इंसान ही इंसान को मार रहा है आखिर क्यों ?

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