शुक्रवार, 14 मई 2010

हालात

35 रूपए में लेना है तो ले, उससे कम नहीं होगा। कंडरा बस्ती की उस महिला के मुंह से ऐसे कटु शब्द सुनकर उस आदमी का चेहरा बेचारगी की हद पार कर गया। उसने बेबस नजरों से महिला को देखा, पर महिला के चेहरे पर कोई भाव नहीं था।

आज सुबह आफिस के लिए निकलने गाड़ी उठाई तो उसने जवाब दे दिया। ..तो आज पैदल ही निकल पड़ा। घर से दफ्तर बहुत दूर नहीं है। रास्ते में ही कंडरा बस्ती पड़ती है। इसी बस्ती से गुजरते वक्त इस भीषण गर्मी में भी हाथ बांधकर खड़े एक अधेड़ पर मेरी नजर गई। सिर पर छोटे-छोटे बाल थे जो पूरी तरह भीग चुका था। वहां से पसीने की बूंदे उसके चेहरे पर आड़ी-तिरछी लकीरें बनाकर उसकी चमक खो चुकी सफेद कमीज पर गिरकर यहां-वहां बिन्दू बना रही थी। कमीज अस्त-व्यस्त थी और कमीज के नीचे उसने एक गमछा लपेट रखा था। एक दुबलाया, मरियल-सा अधेड़। पैर पर चप्पल भी नहीं थी। आंखों में नशा छाया हुआ था और पहली ही बार में देखकर कोई भी कह सकता था कि यह आदमी रातभर सोया नहीं है।

मुझे समझते देर नहीं लगी कि माजरा क्या है। इसी कंडरा बस्ती में एक भाजपा का छोटा नेता भी रहता है। पूरी स्थिति पर नजर रखने मैंने उस भाजपा नेता को आवाज लगाई और वहीं खड़ा हो गया।

दे दे दीदी.. 35 रूपया कहां ले लाव.. 22 ठन रूपया धरे हव। दे दे बहिनी...। उसके शब्दों में दर्द था और वह बुरी तरह गिड़गिड़ा रहा था। ..पर महिला को इससे कोई फर्क नहीं पड़ा। वह वापस भीतर चली गई तो अधेड़ वहीं हाथ बांधे उस दरवाजे पर टकटकी लगाए खड़ा उसके बाहर निकलने का इंतजार करने लगा।

क्या हो गया? - मैंने पूछा तो उसने मेरी तरफ देखे बिना ही जवाब दिया- कुछु नई..।

मैंने कुरेदने के से अंदाज में कहा - क्या मैं कोई मदद कर सकता हूँ?

उसने पहली बार दरवाजे से नजरें हटाई और मेरी ओर देखने लगा। उसकी आंखों में पानी उतर आया और पसीने की बूंदों के साथ मिलकर कहीं खो गया। नि:संदेह उसे मदद की जरूरत थी और मेरी ओर से हुई पहल पर उसकी आस बंध गई थी।

क्या बात है? मुझे बताओ... शायद मैं कोई मदद कर पाऊं?

चार महीने से बीमार हूं। घरवाली झाड़ू-पोंछा कर कमाती थी, पर कल शाम वह भी गुजर गई। - उसने कहा - मेरे शरीर में प्राण नहीं बचे। चलने और बात करने में तकलीफ होती है। घर में कुछ नहीं है। घरवाली का संस्कार कैसे करूं?

उसने बोलना बीच में रोककर मेरी आंखों में कुछ तलाशा और संतुष्ट होकर आगे कहने लगा - किसी तरह 22 रूपए लेकर आया हूं। पर काठी के लिए एक बांस 40 रूपए में दे रहे हैं। कहती है कि 5 रूपए कम कर दूंगी।

अब तक वह छुटभैय्या नेता भी आ गया था। मैंने अलग ले जाकर उससे बात की। अपनी ओर से कुछ रूपए दिए और उसे तमाम हालात बताकर काठी के लिए पूरे बांस की व्यवस्था करने को कहा।

घड़ी देखी तो 11 बज रहे थे। मुझे 10 बजे दफ्तर पहुंचना था। मैंने अपनी जेब में हाथ डालकर पर्स निकाला और 100 रूपए का एक नोट उस अधेड़ के हाथ में पकड़ा दिया। बिना उसे देखे, बिना मुड़े मैं आगे बढ़ गया।

12 टिप्‍पणियां:

  1. ... प्रसंशनीय प्रस्तुति ...!!!

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  2. ... उस गरीब की मदद के लिये ...आभार !!!

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  3. नरेश भाई आपने मानवता का साथ दिया इसके लिए बहुत बहुत धन्‍यवाद.
    अपनी निजी शैली में घटना का बहुत सुन्‍दर चित्रण किया.

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  4. ऐसा भी दर्दनाक मोड जिंदगी में आता है.....

    ईश्वर नहीं हैं....अब धीरे धीरे विश्वास सा हो चला है।

    लेकिन आपने जिस तरह उस वृद्ध की मदद की....उससे थोड़ी बहुत ईश्वरीय आस्था का अंश अब भी रह गया है....।

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  5. ऐसे क्षणों में आपने उस बंदे की मदद कर अपनी मानवीयता का परिचय दिया है।

    शुभकामनाएं

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  6. दर्दनाक...आपका साधुवाद!!

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  7. man gaya yarr naresh.

    sanvwdna hamesha jinda rahna chahiye.

    aapko yaad hoga aapke office ki baju walo dr> Shakuntala jain........
    maine khud aapni aankh se dekhi thi yah bat.,
    usne baju walo old ledy ke ekloute bete ki mout ke bad kaisa behave kiya tha.

    yar yaha to bade bade log madad nahi karte, garibo ko kya kahe.


    aaj ki duniadari ki jatiltao ne insani jasbat ko bhothra kar diya hai.
    aadmi machin bante ja raha hai.........


    but...
    aapne bahut achhchhi bat likhi hai. hamare liye yahi bahut hai ki aaj bhi madad ke liye uthne wale hatho ki kami nahi

    ek bar thanx

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  8. Early this morning God gave me 3 baskets of fruits -

    LOVE + HAPPINESS + PEACE OF MIND and told me 2

    Share them with PPL Dear 2 me. I'm sharing all with U...

    Good Morning!



    ************************************************************************************



    Even though,

    She hates me in every moment of life ,

    But I love her with very seconds,

    Not because she has broken my heart,

    But she as thought me to live with broken heart.



    *************************************************************************************



    Husband: Kal mere khawab main ek larki aye thi. Wah! Kia Larki thee!

    Wife: Akeli ayee hogi?

    Husband: Tum ko kese pata?

    Wife: Uska Husband mere khawab main aya tha!

    --------------

    Banta ped pe chada to upar baithey

    Bandar NE poocha: Upar kyon aaya?

    Banta: Apple khane.

    Bandar: Yeh to aam ka ped hai.

    Banta: Pata hai, Apple saath laya hoon.



    **********************-
    Zindgi ke udaas kagaz par,

    Dil ka paigham likhne wali thi,

    Roshni bikhar gaye warna,

    Main tera naam likhne wali thi.
    rites

    उत्तर देंहटाएं
  9. Even though,
    She hates me in every moment of life ,
    But I love her with very seconds,
    Not because she has broken my heart,
    But she as thought me to live with broken heart.
    ***
    Husband: Kal mere khawab main ek larki aye thi. Wah! Kia Larki thee!
    Wife: Akeli ayee hogi?
    Husband: Tum ko kese pata?
    Wife: Uska Husband mere khawab main aya tha!----
    Banta ped pe chada to upar baithey

    Bandar NE poocha: Upar kyon aaya?
    Banta: Apple khane.
    Bandar: Yeh to aam ka ped hai.
    Banta: Pata hai, Apple saath laya hoon.
    Zindgi ke udas kagaz par,
    Dil ka paigham likhne wali thi
    Roshni bikhar gaye warna
    Main tera naam likhne wali thi
    rites

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